Thursday, September 22, 2022

Ola Cabs के मालिक कभी करते थे साधारण सी नौकरी,आज है 44 हजार करोड़ के मालिक

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कहते है अगर आईडिया दमदार हो और उस पर काम करने वाला शख्स मेहनती हो तो कुछ भी  संभव है. जरुरत दिमाग में आये आईडिया पर सही से मेहनत करने की है. माइक्रोसोफ्ट कंपनी में साधारण सी नौकरी करने वाले शख्स ने आज अपनी मेहनत के दम पर 44 हजार करोड़ का साम्राज्य खड़ा कर लिया है.

हम बात करे रहे है Ola Cabs के फाउंडर भविष अग्रवाल (Bhavish Agarwal) की जिन्होंने अपने शानदार आईडिया और मेहनत के दम पर 44 हजार करोड़ की कंपनी का निर्माण कर डाला.  आज हम बात करने वाले है भारत की सबसे सफल कैब कंनी के निर्माता के बारे में..

भविष अग्रवाल का शुरूआती जीवन (Ola Cabs)

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भविष अग्रवाल का जन्म पंजाब के लुधियाना ने हुआ था. उनका परिवार मध्यमवर्गी था. इसलिए शुरू से ही उनको अपने परिवार से कुछ बड़ा करने की प्रेरणा  मिलती रही थी. भविष पढाई में शुरू से ही एक होनहार छात्र रहे थे. अपनी स्कूली पढाई ख़त्म होने के बाद उन्होंने भारत की सबसे प्रचलित ‘संयुक्त प्रवेश परीक्षा’ को क्रेक करने के साथ भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान, मुंबई से कंप्यूटर विज्ञान में इंजीनियरिंग कर ली.

माइक्रोसॉफ्ट में छोड़ी नौकरी

पढाई पूरी होने के बाद भविष अग्रवाल को दुनिया के सर्वश्रेठ कम्पनियों में शुमार माइक्रोसोफ्ट में रिसर्च एसोसिएट की नौकरी मिल गयी. वहां उनका शानदार प्रदर्शन रहा. इस कंपनी में नौकरी करने के बाद भविष ने 2 पेटेंट फाइल किये, और 3 पेपर इंटरनेशनल जनरल में पब्लिश करवा लिए.

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bhavish agggarwal ola cabs

कंपनी में इतनी सफलता हासिल करने के बावजूद उन्होंने नौकरी छोड़ दी. क्योकि भविष के  मन में कुछ बड़ा करने की थी तो नौकरी छोड़ वो व्यवसाय के विकल्पों को ढूढने में लग गए. इसी बीच एक बार वो कैब में सफर कर रहे थे, तो इस ट्रिप में उनकी कैब ड्राईवर से कहासुनी हो गयी तो वही से उनके मन में कैब सर्विस के व्यवसाय के बारे में विचार आया. वही से शुरुआत हुई ओला कैब्स की.

2010 में रखी गयी Ola Cabs की आधारशिला

भविष अग्रवाल ने अपने दोस्त अकिंत भाटी के साथ 2010 में ओला कैब्स की आधारशिला रखी थी. उनका विचार था की क्यों ना कैब सर्विस को टेक्नोलॉजी से जोड़ कर डिजिटल बनाया जाये . इस विचार के साथ उन्होंने योजना बनायीं की वो मोबाईल एप्प के जरिये लोगों को उनके मन पसंद की कार में ट्रिप करने का अनुभव कराएँगे.

उनका ये कमाल का आईडिया चल गया और आज Ola Cabs के रूप में हम सबके सामने है. इतना ही नहीं नवंबर 2015 में Ola Cabs ने जियोटैग कंपनी का अधिग्रहण करके  बस-शटल सेवा भी आरंभ कर दी है.

आपको बता दें Ola Cabs के बाद भविष अग्रवाल इलेक्ट्रिक कार के क्षेत्र में अपना कदम रख चुके है. 2021 तक उनका ई स्कूटर मार्केट में आ सकता है ऐसा उनकी कंपनी का दावा है.

ये थी इनकी सक्सेस की कहानी. इंसान अपनी मेहनत के बल पर बड़े से बड़ा मुकाम हासिल कर सकता है जरूरत है तो एक कदम बढ़ाने की, बाकि का रास्ता तो अपने आप दिखाई देने लगता है.

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