Thursday, August 4, 2022

इंदिरा और मेनका के बिगड़े रिश्तों की कहानी , जानिए क्या हुआ था उस दिन

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संजय गांधी ने वर्तमान भाजपा नेता मेनका गांधी से 23 सितंबर 1974 को शादी की थी। मेनका गाँधी एक संपन्न परिवार से है और उस वक्त मॉडलिंग में भी सक्रिय थी. स्व संजय गांधी और मेनका गांधी के एक पुत्र वरुण गांधी है । जो भाजपा नेता है। विमान हादसे में संजय गांधी की असमय मृत्यु के वक्त उनके बेटे वरुण मात्र 3 महीने के थे। इस घटना के बाद मेनका गांधी के संबंध परिवार से ज्यादा दिन अच्छे नही रहे।

हालांकि ये रिश्ता हमेशा से ऐसा नही था। आम भारतीय सास-बहू की तरह इंदिरा गांधी और मेनका गांधी के रिश्ते की शुरुआत बेहद खूबसूरत थी, लेकिन कुछ ऐसा हुआ कि यह डोर ज्यादा दिन सही न रह सकी। आइए जानते है मेनका और इंदिरा गांधी के रिश्तों की कहानी.

विज्ञापन में देखा और संजय को पसंद आयी मेनका

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मॉडल रही मेनका संजय गांधी को पहली नजर में ही पसंद आ गयी थी । दोनों की उम्र में 10 साल का अंतर था । मेनका तब 17 साल की थी जब उन्हें पहला विज्ञापन मिला । ये बॉम्बे डाइंग का एक विज्ञापन था । विज्ञापन काफी चर्चित रहा और संजय उन्हें विज्ञापन में देखते ही दिल हार बैठे । मेनका ने कुछ ब्यूटी कांटेस्ट में भी हिस्सा लिया था। चर्चा थी कि संजय गांधी और मेनका के चचेरे भाई वीनू दोस्त है । 14 दिसंबर 1973 को मेनका के भाई वीनू कपूर की शादी के मौके पर मेनका के अंकल मेजर जनरल कपूर ने कॉकटेल पार्टी दी । संजय को इस पार्टी में वीनू कपूर की तरफ से बुलाया गया था। यही दोनों की पहली मुलाकात हुई ।

इस मुलाकात के बाद दोनों मिलने लगे । लेकिन संजय देश के एक चर्चित राजनीतिक परिवार का हिस्सा थे । इस वजह से उनपर मीडिया से लेकर आम आदमी तक की नजर रहती । इसलिए वे कहीं बाहर मिलने के बजाय मेनका के घर पर ही उनसे मिलते ।

इन्दिरा से मिलते वक्त काफी डरी हुई थीं मेनका

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कुछ महीनों चली इस मुलाकात के बाद साल 1974 में संजय गांधी ने मेनका को अपने घर माँ इंदिरा से मिलने बुलाया । 1 सफदरजंग रोड पर इंदिरा गांधी का आवास था। मेनका इस मुलाकात को लेकर सहज नही थी क्योंकि वे देश की तत्कालीन प्राइम मिनिस्टर से डिनर पर मिल रही थी।

इंदिरा गांधी काफी खुले विचारों वाली महिला थी । उन्होंने बड़े बेटे राजीव की शादी उन्ही की मर्जी से सोनिया गांधी से करवा दी थी । इसी तरह वे चाहती थी कि छोटा बेटा भी अपनी पसंद की लड़की से शादी करे।

संजय ने मां इंदिरा को अपने दिल की बात बताई और इंदिरा ने दोनों की शादी के लिए खुशी खुशी रजामंदी दे दी । इंदिरा चाहती थी कि छोटा बेटा भी जल्दी घर बसा ले और जिम्मेदारी संभाले ।

23 सितंबर 1974 को मेनका और संजय गांधी की शादी हुई। शादी में इंदिरा गांधी ने मेनका को खूब गिफ्ट दिये। जिनमे महंगी साड़ियां और ज्वेलरी भी थी । एक खूबसूरत तोहफा जो उनके पिता स्व जवाहरलाल नेहरू से जुड़ा था , वो साड़ी जिसे नेहरू ने जेल में रहते हुए बनाया था मेनका को उपहार स्वरूप दी ।

विमान दुर्घटना के बाद ऐसे बदलने लगे रिश्ते

ये उस दौर की सबसे चर्चित शादी थी । मेनका कई बार उनके साथ राजनीतिक सभाओं में भी गयी। अपने पति और पार्टी को मजबूती देने के लिए मेनका ने एक मासिक पत्रिका “सूर्या” भी शुरू की । बताया जाता है कि शादी के बाद बॉम्बे डाइंग के चर्चित विज्ञापन के अंश भी मिटा दिए गए। दोनों के एक बेटा हुआ वरुण गांधी जो अब भाजपा नेता है ।

संजय गांधी विमान उड़ाने के शौकीन थे। दिल्ली के एक फ़्लाइंग क्लब के रेगुलर मेम्बर थे ।23 जून 1980 को दिल्ली में विमान उड़ाते हुए दुर्घटना का शिकार हो गए । दुर्घटना में उनकी दर्दनाक मौत हो गई ।

मेनका ने बनाया ‘संजय विचार मंच’ तो इंदिरा से हुई कहासुनी


संजय गांधी की मित्र मंडली उस समय काफी चर्चित थी जो अधिकतर उनके इर्द गिर्द रहते । ऐसे ही संजय गांधी के करीबी थे अकबर अहमद । संजय की मौत के बाद अकबर अहमद के साथ मिलकर मेनका गांधी ने संजय विचार मंच की शुरुआत की । इंदिरा गांधी तब भारत मे नही थी वे लंदन के दौरे पर थी ।

जब इंदिरा गांधी ने दिखाई सख्ती

इंदिरा गांधी की अनुपस्थिति में कुछ नेताओं का जिन्हें वो पसन्द नही करती थी , घर आना उन्हें खल रहा था। इंदिरा गांधी 28 मार्च 1982 की सुबह लंदन से भारत वापिस लौटी. मन मे खटास आ चुकी थी । मेनका गांधी ने उनसे नमस्कार करके हाल चाल पूछा तो इंदिरा सख्ती दिखाते हुए बिफर पड़ी । उन्होंने मेनका से साफ साफ बोला – “में तुमसे बाद में बात करूंगी “

वे मेनका से इस कदर नाराज थी कि दोपहर के खाने की मेज पर उन्हें बुलाने से भी मना कर दिया। मेनका का खाना उनके कमरे में भिजवा दिया गया।

उसके बाद करीब एक बजे संदेश भिजवाया कि प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी उनसे मिलना चाहती है । मेनका को अंदेशा था कि सब कुछ ठीक नही है। उन्होंने खुद को इस स्थिति के लिए तैयार कर लिया था।

वे मीटिंग में थी जब इंदिरा गांधी नंगे पैर उनके पास आयी । तब तक उनके निजी सेक्रेटरी धवन और धीरेंद्र ब्रह्मचारी वहां पहुंच चुके थे। इंदिरा जी बहुत गुस्से में थी। वे आते ही मेनका पर बिफर पड़ी । उनका आरोप था कि जब वे लंदन दौरे पर थी उनकी अनुपस्थिति में उनके शत्रुओं को यहाँ बुलाया। उन्होंने मेनका को घर छोड़कर जाने को बोला और कहा कि बाहर गाड़ी खड़ी है अपने पिता के घर चली जाओ।

इस घटना के बाद उनके रिश्ते कभी सामान्य नही हो पाये ।

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