Friday, April 12, 2024

तिहाड़ जेल में समय काट चुके हैं ‘DNA’ के लिए प्रसिद्ध सुधीर चौधरी, इस तरह बने थे ज़ी न्यूज़ के सीईओ

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हाल ही में खबर आई है कि ज़ी न्यूज़ के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वे ज़ी न्यूज़ से लगभग 10 साल पहले 2012 में एक संपादक के रूप में जुड़े थे। अब एक दशक तक ज़ी न्यूज़ को अपनी सेवाएं देने के बाद उन्होंने इसे अलविदा कह दिया है। ट्विटर पर भी उन्होंने अपने बायो में एक्स एडिटर इन चीफ और सीईओ लिख के बदलाव कर दिया है। वे अपने फैन्स को ढांढस बंधा रहे हैं कि वे बहुत जल्द नए पते के माध्यम से उनसे मिलेंगे।

स्कूल-कॉलेज के दिनों में वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भाग लेते थे

प्रख्यात समाचार एंकर, पत्रकार और संपादक सुधीर चौधरी का जन्म 7 जून 1974 में हरियाणा के पलवल गाँव में हुआ था। उन्होंने कला से स्नातक की पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय से की है। ग्रेजुएशन करने के बाद सुधीर चौधरी ने पत्रकारिता और जनसंचार के क्षेत्र में डिप्लोमा करने के लिए भारत की राजधानी नई दिल्ली में स्थित जनसंचार संस्थान में एडमिशन लिया। वे अक्सर अपने स्कूल-कॉलेज के दिनों में विभिन्न वाद विवाद प्रतियोगिताओं में भाग लेते थे। उनके सहपाठी उनके बोलने की कला से बेहद प्रभावित थे। कई शिक्षक उन्हें भाषण देने और डिबेट में भाग लेने के लिए आगे करते थे। वहीं से उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला। अपने आप की वैल्यू बढ़ाने का मौका मिलता गया और वे खुद को श्रेष्ठ बनाने में लगे रहे।

सुधीर चौधरी एक हिन्दू परिवार से ताल्लुक रखते हैं। सुधीर ने नीती चौधरी से विवाह किया। जिससे उनका एक बेटा है। साल 2015 में पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए उन्हें ‘रामनाथ गोयनका’ पुरुस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें दिल्ली गैंगरेप पीड़िता के मित्र का इंटरव्यू लेने के लिए भी सम्मानित किया गया है।

कारगिल वॉर और इस्लामाबाद बैठक को कवर करके मिली प्रसिद्धि

सुधीर ने ज़ी न्यूज़ (Zee News) के एक पत्रकार के रूप में अपने पत्रकारिता करियर का आरंभ वर्ष 1993 में किया। 1993 में ज़ी न्यूज़ ने कदम ही रखा था। सुधीर चौधरी ने ज़ी न्यूज़ चैनल में एक समाचार एंकर के रूप में प्रवेशित हुए। वर्ष 2001 में भारतीय संसद पर हुए हमले और कारगिल युद्ध सहित कई प्रमुख समाचारों को कवर किया। कारगिल युध्द को कवर करके उन्होंने चैनल के साथ ही अपना वैल्यू भी बढ़ाया। सुधीर चौधरी उस टीम में भी शामिल रहे थे जो अटल बिहारी वाजपेयी और परवेज़ मुशर्रफ़ के बीच इस्लामाबाद में हुई मीटिंग को कवर किया था। इन सब बड़ी घटनाओं को कवर करके सुधीर को अलग पहचान मिलती जा रही थी।

2003 में ज़ी न्यूज़ से अलग होने के बाद कई चैनलों में किया काम

वर्ष 2003 में सुधीर ने एक ऐसा फैसला लिया जो कोई नही सोच सकता था। उन्होंने ज़ी न्यूज़ से अलग होने का फैसला लिया और इस्तीफा दे दिया। लेकिन ज़ी न्यूज़ को त्यागने के बाद वे शांत नही बैठे बल्कि दुगुनी शक्ति से साथ अपने जुनून के पीछे लग गए। सुधीर ने हिन्दी टीवी समाचार चैनल “सहारा समय” में जुड़ने का निर्णय लिया। सहारा समय टीवी चैनल सहारा समूह के द्वारा संचालित होता था। उसके शुभारम्भ में सुधीर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सहारा समय को अच्छी तरह से स्थापित करने के बाद सुधीर ने खुद को और आगे बढ़ाने का सोचा और इण्डिया टीवी न्यूज़ चैनल में सम्मिलित हो गए।

इंडिया टीवी में अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं देने के बाद सुधीर ने एक अन्य चैनल में जाने का सोचा। चैनल के प्रधान सम्पादक के रूप में सुधीर ने “लाइव इण्डिया’ में अनुभव में इज़ाफ़ा किया। वर्ष 2012 में चमत्कार हुआ और सुधीर “ज़ी न्यूज़” में वापस लौट कर आये। अपने पुराने चैनल में आने के बाद उन्होंने एक सम्पादक के रूप में कार्य करना शुरू किया। तब से, वह लोकप्रिय प्राइम टाइम न्यूज शो “डेली न्यूज एनालिसिस” (DNA : DAILY NEWS ANALYSIS) के माध्यम से भारतवासियों को हर खबर की अपने अलग अंदाज से प्रस्तुति दे रहे थे।

डेली न्यूज़ एनालिसिस (DNA)

ज़ी न्यूज़ के इस प्राइम टाइम शो को बच्चे-बूढ़े सभी देखना पसंद करते हैं। सुधीर चौधरी के इस्तीफे की जानकारी के बाद उनके ट्विटर पर डीएनए (DNA) शो के डाई हार्ड प्रशंसको के ट्वीट आ रहे हैं। इस प्राइम टाइम शो की घोषणा 2 जुलाई 2013 को की गई थी। लगभग 9 सालों से यह शो निरंतर चला आ रहा है। पहले इसका नाम डेली न्यूज़ एंड व्यूज (Daily News And Views) रखा गया था लेकिन कुछ हफ़्तों बाद ही नाम बदलकर डीएनए कर दिया गया। उसके बाद इस नाम ने इतिहास रच दिया।

जब 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल की हवा खानी पड़ी

बात है नवम्बर 2012 की जब फेमस पत्रकार सुधीर चौधरी तथा उनके साथी समीर अहलूवालिया को अवैध वसूली के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। सुधीर चौधरी की यह गिरफ्तारी एक महशूर उद्योगपति तथा कांग्रेसी सांसद नवीन जिन्दल की एक शिकायत पर किया गया था। इस शिकायत में जिन्दल साहब ने कहा था कि दोनों पत्रकारों (सुधीर चौधरी और समीर अहलूवालिया) ने उनसे, जिन्दल समूह तथा कोयला घोटाले को एक साथ जोड़ती हुई कोई भी न्यूज़ ना चलाने के बदले 100 करोड़ रुपए की माँग रखी थी। सुधीर व उनके साथ को तिहाड़ जेल में 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। बाद में वे दोनों जमानत पर छूट गए।

सुधीर चौधरी को ज़ी न्यूज़ से दोबारा अलग होने के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि वे किसी अन्य बड़े न्यूज़ चैनल के साथ जुड़कर अपने फैंस को और भारतवासियों को डेली न्यूज़ एनालिसिस दिखाएंगे। ट्वीटर के माध्यम से उन्होंने यह कन्फर्म कर दिया है कि वे अवश्य किसी नए चैनल के साथ जुड़ने वाले हैं। इस्तीफे के कुछ दिनों पहले से ही वे अपने प्राइम टाइम शो को नही चला रहे थे। वे पहाड़ो की सैर पर हैं और टूरिस्ट बनकर जीवन का आनंद ले रहे हैं।

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