Saturday, June 25, 2022

‘ कुरान ही हमारा संविधान, कोर्ट की इस सजा को नहीं मानते,’ फांसी की सजा पर बोले सीरियल ब्लास्ट के गुनाहगार

- Advertisement -

अहमदाबाद के चर्चित सीरियल ब्लास्ट केस में फांसी की सजा पाए दोषियों का कहना है कि वे इस सजा को नही मानते। उनका भारत के संविधान में भी भरोसा नही है । उनके हिसाब से कुरान ही उनका संविधान है । इसलिए भारतीय संविधान की ये सजा वे नही मानते ।

अहमदाबाद के सीरियल ब्लास्ट के 38 दोषियों में से 6 दोषी भोपाल की सेंट्रल जेल में है. एक निजी चैनल के अनुसार जेल सूत्रों ने बताया कि सजा सुनने के बाद ब्लास्ट के दोषियों ने ये बात कही है ।

- Advertisement -

अहमदाबाद के ये सीरियल ब्लास्ट साल 2008 में हुए थे जिनमें 56 लोगो की जान गई । और 200 से ज्यादा घायल हुए थे । अब इन्ही 38 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई है व अन्य 11 को आजीवन कारावास की सजा भुगतनी होगी ।

संविधान को नही मानते कुरान ही उनका संविधान

न्यूज चैनल के अनुसार भोपाल सेंट्रल जेल के सूत्रों ने बताया कि जैसे ही दोषियों को ये जानकारी मिली कि उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई है उनके चेहरे मुरझा गए हैं और उन्हें बड़ा झटका लगा है । उनके हाव भाव से ही लगता है कि वे हिल गए है ।

- Advertisement -

जेल सूत्रों के मुताबिक, सीरियल ब्लास्ट में फांसी की सजा पाने वाले गुनहगारों ने जेल स्टाफ से बात करते हुए कहा है कि उनका विश्वास उनके धर्म की किताब में है । वही उनका संविधान है । भारतीय संविधान को वो नही मानते इसलिए इस सजा के उनके लिए कोई मायने नही है।

ऐसा पहली बार नही है कि जब इस तरह के धर्मांध संगठनों ने संविधान के बारे में ऐसी अनर्गल टिप्पणी की हो । इंडियन मुजाहिदीन के अलावा कट्टर इस्लामिक संगठन सिमी ( SIMI ) स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया के सदस्य भी कई बार ऐसे बोल चुके है ।

भोपाल की सेंट्रल जेल में बंद है मास्टरमाइंड

भोपाल की सेंट्रल जेल में जो 6 दोषी बंद है उनमें अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट का मास्टरमाइंड सफदर नागौरी भी है. सफदर नागौरी के अलावा 5 अन्य दोषियों में  शादुली,हाफिज आमिल परवेज, शिवली , कमरुद्दीन नागौरी है और इन सभी को फांसी की सजा सुनाई गई है । इनके एक साथी अंसाब है जो उन 11 दोषियों में शामिल है जिन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई.

पहली बार इतने लोगो को फांसी

बता दे कि देश मे पहली बार इतनी बड़ी संख्या में फांसी की सजा का ऐलान किया गया है । अहमदाबाद के इस मामले में कुल 49 दोषी थे । 8 फरवरी को इस मामले में कुल 78 लोगो की पेशी हुई थी जिसमे से 49 के इस मामले में शामिल होने के सबूत मिले थे और 28 को बरी कर दिया गया था । अब स्पेशल कोर्ट ने इनमे से 38 को फांसी की सजा सुनाई गई है जो भारतीय इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा फैसला है ।

अहमदाबाद ब्लास्ट केस

ये धमाके 26 जुलाई 2008 को शाम 6.45 पर अहमदाबाद में सिलसिलेवार किये गए थे । इन धमाकों में 56 लोगो की मौत हुई थी व 200 से अधिक लोग घायल हुए थे । पूरे 13 साल तक सुनवाई चली और 1163 लोगो की गवाही दर्ज हुई  । इस मामले की जांच के दौरान पुलिस ने 6 हजार सबूत भी पेश किये। मामले में दोषियों पर धारा 302 और UAPA लगाई गई थी। कट्टर संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन ने इस ब्लास्ट की जिम्मेदारी ली थी । इन्हें 2002 के गोधरा कांड का बदला बताया गया था ।

26 जुलाई 2008 को गुजरात के अहमदाबाद में कुल 70 मिनट के अंदर 21 धमाके किये गए थे जिनमे भारी  जानमाल की हानि हुई । दोषियों को फांसी के फंदे तक पहुँचने में 13 साल से ज्यादा का समय लगा ।

- Advertisement -
RELATED ARTICLES

Most Popular