Thursday, April 18, 2024

झोले और हेयरबैंड्स से की शुरुआत, आज बन गई लाखों की कंपनी, जानिये पद्मश्री मुक्तामणि देवी की कहानी

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बीते दिन पूरे देश ने बड़ी धूमधाम से 73वां गणतंत्र दिवस मनाया। इस मौके पर राजपथ पर शानदार परेड का आयोजन किया गया जिसमें वायुसेना के 75 लड़ाकू विमानों ने फ्लाई पास्ट किया।

पद्मश्री से हुई सम्मानित

इस दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्म पुरुस्कारों से विजेताओं को सम्मानित किया। इन्हीं में एक नाम मोइरांगथेम मुक्तामणि देवी का भी है। इन्हें राष्ट्रपति के द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

ऊन से बनाए जाते हैं जूते

बता दें, मणिपुर के काकचिंग की निवासी मुक्तामणि देवी ने इन दिनों काफी चर्चाओं मे हैं। इसका कारण है कि इनके द्वारा खड़ी की गई एक कंपनी जिसका नाम मुक्ता शूज़ इंडस्ट्री है। इस कंपनी के तहत ऊन से बनकर जूते तैयार किये जाते हैं। उनका यह नया स्टाइल लोगों को काफी पसंद आ रहा है। यही कारण है कि केंद्र सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया।

आर्थिक तंगी से परेशान थी मुक्ता

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुक्तामणि देवी का जीवन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। उनकी आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि वे दिन में धान के खेतों पर काम किया करती थीं, शाम को सब्जी बेंचती थी और कुछ अधिक पैसे कमाने के लिए झोले और हेयरबैंड बनात थीं। इससे जो भी आमदनी होती थी उससे वे अपने बच्चों की फीस भरती थीं।

बेटी के लिए जूते सिलकर आया बिजनेस का आइडिया

एक बार उनकी छोटी बेटी के स्कूल के जूते फट गए थे, उस समय मुक्ता की आर्थिक स्थिति कुछ ठीक नहीं थी। इसलिए उन्होंने ऊन से सिलकर जूते का सोल तैयार कर दिया और बच्ची को पहना दिया। उधर, जब बच्ची स्कूल पहुंची तो उसकी अध्यापिका ने पूछा कि ये जूते तुमने कहां से लिए? इसपर उसने कहा मेरी मां ने बनाए हैं। अध्यापिका को उनकी यह कला काफी पसंद आई थी। यह बात बच्ची ने अपनी मां को बताई।

स्थापित की कंपनी

यहीं से मुक्ता को ऊन के जूते तैयार करने का आइडिया मिला। इसके लिए उन्होंने 1991 में मुक्ता शूज़ इंडस्ट्रीज़ नाम से एक कंपनी की स्थापना की। इस कंपनी के तहत वे खुद ऊन से बुनकर जूते तैयार करती। देखते ही देखते कुछ ही दिनों उनके इस प्रोडक्ट की डिमांड बढ़ गई जिसके बाद उन्होंने अन्य लोगों को इस काम के लिए हायर कर लिया।
मालूम हो, इस वक्त मुक्ता द्वारा शुरु की गई इस इंडस्ट्री के तहत उन्होंने 300 लोगों को रोजगार देने का काम किया है। इसके अलावा 1000 से ज्यादा लोग उनसे यह काम सीखकर अपना बिजनेस कर रहे हैं।

लोगों को दिया रोजगार

एक समाचार पत्र से अपने बिजनेस के विषय में बात करते हुए मुक्ता ने बताया था कि उनकी कंपनी में पुरुष जूतों के सोल बनाते हैं जबकि महिलाएं बुनाई का कार्य करती हैं। इसके लिए पुरुषों को 50 रुपये प्रति सोल के हिसाब से दिए जाते हैं। वहीं महिलाओं को 500 रुपये दिन के हिसाब से दिए जाते हैं।
गौरतलब है, मुक्ता इंडस्ट्रीज़ द्वारा तैयार किए गए इन जूतों की कीमत 200-800 रुपये है।

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