Friday, May 13, 2022

पढ़ाई का ऐसा जुनून कि पहले बना पुलिस वाला, बाद में करी PhD और बन गया प्रोफेसर

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कहते हैं कि अगर मेहनत की जाए तो हर सपने को पूरा किया जा सकता है। आज हम आपको एक ऐसे व्यक्ति के विषय में बताने जा रहे हैं जिन्होंने अपने अध्यापक बनने के सपने को पूरा करने के लिए एक अनोखा रास्ता अपनाया जिसे विषय में जानकर हैरान हो जाएंगे आप।

बचपन से तेज़ थे अरविंद

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इनका नाम अरविंद परुमल है। इनका जन्म तमिल नाडु के एक गरीब किसान परिवार में हुआ था। ये बचपन से ही पढ़ाई में होशियार थे लेकिन अपनी आर्थिक तंगी के चलते काफी मुश्किलों से स्कूल की फीस भर पाते थे। उन्होंने जैसे-तैसे अपना ग्रेजुएशन कंप्लीट किया इसके बाद पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए दाखिला ले लिया।

आर्थिक तंगी बनी रोड़ा

अरविंद का सपना था कि वे अध्यापक बनें। इसलिए पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने पीएचडी करने का मन बनाया। हालांकि, घर की जिम्मेदारियां और आर्थिक दिक्कतों के आगे उन्हें झुकना पड़ा।

अब तक अरविंद 23 वर्ष के हो चुके थे और उनके पिता बूढ़े हो चुके थे। इस वजह से अब उनपर ही घर के पालन-पोषण की जिम्मेदारी थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अरविंद ने ‘तमिल नाडु पब्लिक सर्विस कमिशन’ की तैयारी की और 23 वर्ष की आयु में परीक्षा पास करके कॉन्सटेबल बन गए।

पीएचडी में लिया एडमिशन

पुलिस की नौकरी के बवजूद अरविंद अपना अध्यापक बनने का सपना नहीं भूले। उन्होंने नौकरी के दौरान ही पीएचडी की तैयारी की। इसके लिए उन्होंने मनोंमणियम सुंदरनर यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए एग्जाम दिया जिसमें वे पास हो गए।

इसके बाद अरविंद ने पुलिस अधीक्षक और तमिल नाडु कोस्टल पुलिस के डीआईजी आर चिन्नस्वामी से आग्रह किया कि उन्हें पुलिस की नौकरी के दौरान पीएचडी करने की अनुमति दी जाए। इसपर अधिकारी खुश हो गए और उन्होंने अरविंद को पार्ट टाइम पीएचडी करने की छूट दे दी।

मालूम हो, इसके बाद अरविंद ने ‘अनौपचारिक क्षेत्र में वेतन स्तर पर आर्थिक अध्ययन’ विषय पर अपनी थीसीस लिखी। साल 2019 में उनकी मेहनत रंग लाई और 2021 में उन्हें डॉक्टरेट की डिग्री मिल गई।

बीते कल को याद कर भावुक हुए अरविंद

गौरतलब है, अरविंद ने पहले 11 सालों तक पुलिस की नौकरी की अब उन्होंने इससे इस्तीफा दे दिया है। अब वे नागरकोई स्थित एसटी हिंदू कॉलेज में प्रोफेसर बन गए हैं। मीडिया से बात करते हुए 34 वर्षीय अरविंद ने अपने बीते हुए कल के विषय में बताया कि ‘मैं किसान का बेटा हूं। हमारा परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। इसलिए मेरी पढ़ाई के दौरान परिवार को सपोर्ट करने के लिए मैंने किसान बन खेती की। मेरे ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन के दौरान मैं खेतों में हल चला रहा था। मैं PhD करना चाहता था, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते ऐसा नहीं कर सका’।

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