Saturday, October 1, 2022

कॉलम में छपा, “वाजपेयी आदमी अच्छे हैं मगर गलत पार्टी में हैं”, ऐसा था अटलजी का रिएक्शन

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भारत के दसवें प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी जी अपने हाजिरजवाबी के लिए जाने जाते थे। वे हिंदी कवि, पत्रकार एवं प्रखर वक्ता थे। उन्होंने राष्ट्रीय भावनाओं से ओतप्रोत कई पत्र-पत्रिकाओं का संपादन भी किया। अपने प्रधानमंत्री के कार्यकाल में उन्होंने ये भी करके दिखाया कि इस देश में संगठन वाली सरकार को भी सफलतापूर्वक चलाया जा सकता है।

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जब महशूर लेखक खुशवंत सिंह ने अपने कॉलम में लिखा।

ट्रैन टू पाकिस्तान (पाकिस्तान मेल) जैसी बेहतरीन किताब लिखने वाले खुशवंत सिंह जी ने अपने कॉलम में अटल जी के बारे में लिखा कि, अटल बिहारी बाजपेयी बहुत अच्छे आदमी हैं, स्टेट्समैन हैं, विदेश नीति भी बहुत अच्छी की थी इन्होंने। लेकिन एक ही माइनस प्वाइंट है उनमें, आदमी ठीक हैं मगर गलत पार्टी चुनी हैं।”

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रजत शर्मा के शो में अटल जी ने दिया रिएक्शन

1999 में जब अटल जी रजत शर्मा के चर्चित शो आप की अदालत में पहुंचे तब उनसे इस बारे में पूछा गया। जब रजत शर्मा ने खुशवंत सिंह की लिखी पूरी लाइन पढ़के सुनाई तब दर्शकों के साथ अटल जी भी हंस पड़े। फिर उन्होंने कहा, “सरदार खुशवंत सिंह की मैं बड़ी इज्जत करता हूँ। वो बहुत अच्छा लिखते हैं। उनका लिखा हुआ पढ़ने में बड़ा आनंद आता है। उन्होंने जो मेरी तारीफ की है उसके लिए उनका शुक्रिया अदा करता हूं लेकिन उनकी इस बात से मैं सहमत नहीं हूं कि मैं आदमी तो अच्छा हूं मगर गलत पार्टी में हूं।”

अटल जी आगे कहते हैं कि अगर वे सचमुच में अच्छे आदमी हैं तो गलत पार्टी में कैसे हो सकते हैं। और अगर गलत पार्टी में हूँ तो मैं अच्छा आदमी नही हो सकता।

अटल बिहारी बाजपेयी जी का पहला कार्यकाल मात्र 13 दिनों का ही था। 1996 16 मई से शुरू होकर 13 दिनों में समाप्त हुआ। वे दूसरी बार सत्ता में आए तो 13 महीने ही प्रधानमंत्री रहे। फिर तीसरी बार वे 1999 से 2004 तक प्रधानमंत्री की कुर्सी पर रहे।

जो पार्टी चुनी उसमें रहकर किये गए अटलजी के कार्य

अटल जी ने अपने कार्यकाल में ही पोखरण में परमाणु परीक्षण करवाया था। भारत को जोड़ने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज सड़क योजना अटल जी ने ही लागू किया। अटल जी ने बीएसएनएल के एकाधिकार को खत्म करके भारत में संचार क्रांति के दूसरे चरण के लिए मार्ग प्रशस्त किया और नए टेलीकॉम कंपनियों का स्वागत किया। 6 साल से 14 साल तक के बच्चों को मुफ्त शिक्षा का अभियान इनके कार्यकाल में ही लागू हुआ।

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