Wednesday, September 28, 2022

दुनिया दहलाने वाला 36 साल पहले का कनिष्क विमान हादसा ,जिसका कनेक्शन “ऑपरेशन ब्लू स्टार ” से था

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23 जून 1985 की वो तारीख जिसकी शुरुआत एक बम धमाके के साथ हुई थी। कनाडा के इतिहास में दर्ज कनिष्क विमान हादसा आज भी लोगों के रौंगटे खड़े कर देता है। इस दिन एयर इंडिया की फ्लाइट 182 और बोइंग 747 प्लेन को आतंकियों ने बम से उड़ा दिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, टोरंटो से चली इस फ्लाइट को लंदन होते हुए नई दिल्ली आना था।

विमान अटलांटिक महासागर के ऊपर करीब 31 हजार फीट की उंचाई पर उड़ान भर ही रहा था कि अचानक प्लेन में तेज धमाका हुआ और प्लेन आग का गोला बन गया। इस हादसे में 329 लोगों की जान चली गई थी जिसमें 307 पैसेंजर और 22 क्रू मेंबर्स शामिल थे।

खालिस्तानियों ने किया था आतंकवादी हमला

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खबरों के मुताबिक, इस हमले की जिम्मेदारी कट्टरपंथी सिख संगठन बब्बर खालसा ग्रुप ने ली थी। यह हमला 1984 में तत्कालीन भारत सरकार द्वारा स्वर्ण मंदिर पर की गई कार्रवाई के विरुद्ध किया गया था।

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इस हमले ( कनिष्क विमान हादसा ) में कुल 329 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी जिनमें 268 कनाडा के, 27 इंग्लैंड के, 10 अमेरिका के और 2 भारत के थे। वहीं, प्लेन के क्रू में शामिल सभी 22 लोग भारतीय थे जिनकी भी मौत हो गई थी।

ऑपरेशन ब्लू स्टार से थी नाराज़गी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निर्देशानुसार अम्रितसर स्थित स्वर्ण मंदिर में ऑपरेशन ब्लू स्टार के तहत बड़ी कार्रवाई की गई थी। कट्टरपंथियों के कब्जे से स्वर्ण मंदिर को मुक्त कराने के उद्देश्य से चलाए गए इस ऑपरेशन में 83 जवान और 492 आम नागरिक मारे गए थे।

जानकारी के अनुसार, जरनैल सिंह भिंडरावाले को गिरफ्तार करने के लिए सेना के जवानों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थीं। जिसके बाद पंजाब में नरसंहार हुआ था। कहा जाता है कि पीएम इंदिरा के इस फैसले से नाराज़ कट्टरपंथियों ने कनिष्क विमान हादसे को अंजाम दिया था।

इंदिरा की मौत का कारण बना ऑपरेशन ब्लू स्टार

पंजाब में सिख आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए तत्तकालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा चलाए गए ऑपरेशन ब्लू स्टार के तहत आतंकी भिंडरावाला सहित उसके तमाम साथियों की मौत हो गई थी।  इस ऑपरेशन के दौरान स्वर्ण मंदिर के कुछ हिस्सों को भी क्षति पहुंची थी। इससे सिख समुदाय का एक तबका पीएम इंदिरा से नाराज था।कनिष्क विमान हादसा

यही वजह थी दो सिखों ने उनकी दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी थी। दोनों हत्यारे इंदिरा के बॉडीगार्ड के रुप में नियुक्त थे। इन्होंने महज़ 1 मिनट में 30 गोलियां दागकर उन्हें भून डाला था। सिख समुदाय की तरफ से किए गए इस कृत्य का नतीजा यह रहा कि राजधानी दिल्ली समेत देश के ज्यादातर हिस्सों में सिखों के खिलाफ दंगे भड़क गए थे। इन दंगों में हजारों की संख्या में लोगों की मौत हुई थी।

सम्राट कनिष्क के नाम पर रखा गया था फ्लाइट का नाम

एयर इंडिया की इस फ्लाइट का नाम भारत के महान शासक सम्राट कनिष्क के नाम पर रखा गया था। इतिहास के अनुसार, कनिष्क का शासन आधे चीन तक फैला हुआ था। उनकी महानता और वीरता से प्रेरणा लेते हुए विमान कंपनी ने इस फ्लाइट का नाम कनिष्क रखा था। यही वजह है कि इस हादसे को कनिष्क विमान क्रैश ( कनिष्क विमान हादसा ) के नाम से भी जाना जाता है।

इंद्रजीत सिंह रेयात को हुई थी 15 साल की सजा

सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की गई इस मामले की जांच को पूरा होने में 20 साल का वक्त लगा था। इस जांच में हमले की जिम्मेदारी इंद्रजीत सिंह रेयात पर डाली गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रेयात ने बम ब्लास्ट के लिए डेटोनेटर, डायनामाइट और बैटरीज खरीदीं थी। यही वजह थी कि उसे कनाडा की विशेष अदालत ने 15 साल की सजा सुनाई थी।

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